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Gathiya Ka Ilaj- गठिया के लक्षण और इलाज

जोड़ों के दर्द को अर्थराइटिस (Arthritis) कहते हैं। यह शरीर की एक जोड़ या कई जोड़ों में हो सकता है। गठिया / अर्थराइटिस के सौ से भी अधिक प्रकार होते हैं। जिसमें से मुख्य Osteroarthritis और Rheumatoid Arthritis है। सभी के अलग-अलग कारण और इलाज हैं। अर्थराइटिस के मुख्य लक्षण जोड़ों में दर्द और अकड़न है, जो उम्र के साथ-साथ और भी बढ़ जाते हैं। इस लेख में जानें  गठिया के लक्षण और इलाज- Gathiya Ka Ilaj.

गठिया/ अर्थराइटिस के प्रकार:

गठिया के कई प्रकार होते हैं, परंतु इसके सबसे मुख्य प्रकार है- Osteroarthritis और Rheumatoid Arthritis

Osteroarthritis- यह मुख्यत: जोड़ों में टूट-फुट और घिसने की वजह से होता है जिससे हड्डियां आपस में रगडने लगती है और असहनीय दर्द का अनुभव होता है। आपको अपनी उंगलियों और घुटनों में दर्द का अहसास होता है।

यह ज्यादातर बढ़ती उम्र के साथ होता है। हालांकि चोट, फ्रैक्चर (Fracture) के कारण भी Osteoarthritis हो सकता है। जिन व्यक्तियों को Osteoarthritis है, उन्हें निम्न लक्षणों का भी अनुभव होता है।

* जोड़ों में दर्द या अकड़न।

* दर्द जो व्यायाम या दबाव के कारण और बढ़ जाए।

* जोड़ों से रगड़ और चटकाहट की आवाज आना।

* सुबह के समय जोड़ों का अकड़न जाना।

* दर्द जो नींद खराब करें।

कई व्यक्ति जिन्हें osteoarthritis है, कोई भी लक्षणों का अनुभव नहीं करते। हालांकि X-Ray रिपोर्ट से यह पता चल जाता है कि उन्हें Osteoarthritis है।

Rheumatoid Arthritis- इसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपने ही टिशू को नष्ट करने लगती है, जिसकी वजह से जोड़ों की हड्डियों को भी नुकसान पहुंचता है, जिससे जोड़ों में दर्द का अनुभव होने लगता है।

Rheumatoid arthritis उंगलियों, घुटनों, हाथों, पैरों, कंधों में कहीं भी हो सकता है। इसमें दर्द के साथ साथ सूजन और अकड़न भी हो जाती है और अंगों को हिलाने में भी दर्द होता है। इसके अन्य लक्षण हैं-

* थकान

* बुखार

* वजन में कमी आना

* आंखों में जलन

* हाथो, उंगलियों और पैरों का सुन हो जाना

* नींद आने में दिक्कत होना

गठिया/ अर्थराइटिस के लक्षण:

गठिया का सबसे मुख्य लक्षण जोड़ों में दर्द होना, लेकिन आपके लक्षण अर्थराइटिस के प्रकार पर निर्भर करतें हैं। अर्थराइटिस के लक्षण निम्नलिखित हैं-

* जोड़ों में दर्द

* जोड़ों में अकड़न

* जोड़ों में सूजन

* जोड़ों में लालपन

* जोड़ों को हिलाने में दिक्कत

* काम करने में दिक्कत

अर्थराइटिस के खतरे:

जाने किन्हें अर्थराइटिस होने के खतरे ज्यादा होते हैं:

1. परिवार इतिहास- अगर आपके परिवार में पहले किसी भी सदस्य को गठिया की बिमारी रही हो, तो आपको भी इस बिमारी का होने का खतरा ज्यादा होता है।

2. उम्र- गठिया होने का खतरा उम्र के साथ साथ बढ़ता है।

3. लिंग- महिलाओं को Rheumatoid अर्थराइटिस होने का खतरा पुरुषों के मुकाबले ज्यादा होता है।

4. चोट- उन व्यक्तियों को अर्थराइटिस होने का खतरा ज्यादा होता है जिन्हें पहले कभी जोड़ों में चोट लगी हो।

5. मोटापा- अधिक मोटापे वाले व्यक्तियों को अर्थराइटिस होने का खतरा पतले व्यक्तियों से ज्यादा रहता है।

6. खानपान- अनियमित भोजन, जंक फूड, ज्यादा मांसाहारी वाले भोजन, ज्यादा तेल युक्त भोजन खाना भी अर्थराइटिस होने के खतरे को बढ़ाते हैं।

गठिया/ अर्थराइटिस के लिए जांच:

1. गठिया की बीमारी को निश्चित करने के लिए आपके डॉक्टर आप की जांच करेंगे जो निम्न है-

2. आपके डॉक्टर आपकी अन्य बीमारियां, परिवार इतिहास के बारे में पूछेंगे।

3. डॉक्टर आपकी शारीरिक जांच करेंगे।

4. आपके डॉक्टर आपके जोडो में सुजन या लालपन की जांच करेंगे।

5. डॉक्टर आपके जोड़ों की X-Ray, MRI या अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) जांच करेंगे।

अर्थराइटिस के इलाज:

अर्थराइटिस के इलाज का मुख्य उद्देश्य दर्द सुजन को कम करना और जोड़ों को और खराब होने से बचाना है ताकि आप एक स्वास्थ्य जीवन जी सकें दवाइयों और जीवनशैली दबाव से आप अपने जोडो को और अधिक खराब होने से बचा सकते हैं।

अर्थराइटिस की इलाज निम्न हैं:

1. दवाइयां- दवाइयों के माध्यम से जोड़ों के दर्द को कम किया जा सकता है। दवाइयों से जोड़ों को और ज्यादा खराब होने से भी बचाया जा सकता है।

2. फिज़िकल थेरेपी (Physical therapy)- फिज़िकल थेरेपी में कई प्रकार के उपकरणों की मदद से जोड़ों के दर्द में राहत दिलाई जाती है और जोडो को मजबूत किया जाता है।

3. सर्जरी (Surgery)- अगर जोर ज्यादा खराब हो गए हो और दवाइयों के माध्यम से ठीक नहीं किया जा सके तो जॉइंट रिपेर (Joint Repair) या जॉइंट रीप्लेस्मेंट (Joint Replacement) जैसी सर्जरी की जाती है।

4. अन्य तरीके- एक्यूपंक्चर (Accupunture), मसाज, योग, हीट थेरेपी (Heat therapy) के माध्यम से भी जो को ठीक किया जाता है अगर जोड ज्यादा खराब ना हुए हो ,ये सब जोड़ों के दर्द से भी राहत प्रदान करते हैं।

गठिया के जीवन शैली संबंधी उपाय और इलाज:

1. आहार- गठिया के इलाज के लिए कोई विशेष आहार नहीं है, लेकिन स्वस्थ्य पोषण युक्त आहार अर्थराइटिस के लक्षणों को कम करने में मददगार हैं, ज्यादा तले हुए भोजन से बचना चाहिए। आपको ज्यादा उन आहार को खाना चाहिए, जिसमें एंटीऑक्सीडेंट (anti-oxidants) और एंटी इंफ्लेमेटरी (anti-inflammatory) गुण होते हैं।

2. वजन- गठिया के इलाज में महत्वपूर्ण है कि आप अपने वजन को नियंत्रित रखें , अगर आपका वजन ज्यादा है तो उसे कम करें।

3. व्यायाम करें- गठिया के दर्द से बचने के लिए आपको नियमित रूप से हल्के व्यायाम करने चाहिए।

4. पूरी नींद- नींद का हमारे शरीर पर बहुत प्रभाव होता है। अधूरी नींद हमारे शरीर पर बुरा प्रभाव डालती है और अर्थराइटिस के खतरे को बढ़ाती है।

5. जोड़ों का ध्यान रखें- एक ही मुद्रा में ज्यादा देर ना बैठें और अपने जोडो पर ज्यादा दबाव ना डालें।

गठिया/ अर्थराइटिस के घरेलू उपाय और इलाज:

अगर आपकी गठिया की समस्या अभी शुरुआती स्तर में है, तो कुछ घरेलू उपायों की मदद से भी आप अर्थराइटिस के लक्षणों को कम या ठीक कर सकते हैं जो निम्न हैं-

1. हल्दी- शोध के अनुसार हल्दी में कुछ ऐसे गुण होते हैं, जो अर्थराइटिस में होने वाले दर्द को कम करते हैं।

2. ग्रीन टी (Green Tea)- ग्रीन टी में polyphenols नामक तत्व पाया जाता है और इस polyphenol में एंटीऑक्सीडेंट (anti-oxidants) होते हैं जो जोडो को सुरक्षित रखते हैं।

3. दालचीनी- दालचीनी में एंटी इंफ्लेमेटरी (anti-inflammatory) गुण होते हैं जो जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में मदद करते हैं।

4. लहसुन- लहसुन प्रो-इंफ्लेमेटरी (Pro-inflammatory) साइटोकिन्स (cytokines) के उत्पादन को कम करने में मदद करते हैं जो जोडो के दर्द कारण है।

5. अदरक- अदरक में एंटी इंफ्लेमेटरी (anti-inflammatory) गुण होते हैं, जो अर्थराइटिस के लक्षणों को कम करते हैं। अदरक में ऐसे तत्व होते हैं जो स्वस्थ्य कोशिकाओं को नष्ट करने वाले T-cells के प्रभाव को कम करते हैं और जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद करते हैं।

अर्थराइटिस के बेहतर इलाज के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क और सलाह करें और स्वास्थ्य जीवन जियें।

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