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गर्भपात के लक्षण और कारण- Garbhpat Ke Lakshan Karan

गर्भपात ( Miscarriage) का मतलब है वह गर्भवस्था जो 20 सप्ताह के गर्भकाल के अंदर अपने आप ही समाप्त हो जाए। गर्भपात होने के बाद सबसे पहले जो प्रश्न महिला या कपल के दिमाग में आता है, कि गर्भपात क्यों हुआ? गर्भपात एक बहुत ही कष्टदायक स्थिति होती है और अक्सर महिलाएं अवसाद में चली जाती है। कई महिलाएं या कपल इसके लिए अपने आप को दोषी ठहराने लगते हैं लेकिन सच तो यह है
कि गर्भपात के कई कारणों को रोका नहीं जा सकता, ज्यादातर गर्भावस्था के आरंभिक दिनों में। गर्भपात के कारण तय करना आसान नहीं है। डॉक्टर की सलाह और गर्भधारण से पहले अपने स्वास्थ्य को बेहतर करके गर्भपात से बचा जा सकता है। हर महिला के गर्भपात के लक्षण और कारण भिन्न होते हैं। इस लेख में आप जानेंगे गर्भपात के प्रकार, लक्षण और कारण- Garbhpat Ke Lakshan Karan

गर्भपात के खतरे:

1. महिलाओं में प्रसव सालों के दौरान गर्भपात होने के खतरे 10 से 25% तक होते हैं।

2. महिलाओं में उम्र के साथ साथ गर्भपात का खतरा भी बढ़ जाता है।

3. 35 साल से कम उम्र वाली महिलाओं में गर्भपात का खतरा 15% तक होता है।

4. 35 से 45 साल की महिलाओं में गर्भपात होने का खतरा 20 से 35% तक होता है।

5. 45 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में गर्भपात का खतरा 50% तक होता है।

6. जिन महिलाओं को पहले ही गर्भपात हो चुका है उनमें फिर से गर्भपात होने का खतरा 25% तक होता है।

गर्भपात के प्रकार:

गर्भपात के कई प्रकार हैं और यह गर्भपात के कारण और गर्भावस्था के अलग-अलग चरणों पर निर्भर करते हैं।

1. अभिशप्त डिंब (Blighted Ovum)- इसमें फर्टिलाइज़्ड (Fertilized) अंडा गर्भाशय में इम्प्लान्ट (Implant) हो जाता है लेकिन बढ़ नहीं पाता।

2. संपूर्ण (Complete) गर्भपात- इसमें गर्भावस्था के संपूर्ण अवशेष शरीर से निष्कासित हो जाते हैं।

3. मिस्ड गर्भपात (Missed Miscarriage)- इसमें भ्रूण की मृत्यु बिना किसी जानकारी के हो जाती है आपको पता भी नहीं लगता।

4. बार-बार गर्भपात (Recurrent Miscarriage)- 3 या उससे ज्यादा बार गर्भपात होना को Recurrent Miscarriage बार-बार गर्भपात कहते हैं।

5. अस्थानिक गर्भपात (Ectopic Miscarriage)- इसमें फर्टिलाइज़्ड (Fertilized) अंडा गर्भाशय के बजाय फैलोपियन ट्यूब (Fallopian tube) में इम्प्लान्ट (Implant) हो जाता है जो आगे बढ़ नहीं पाता और गर्भपात हो जाता है।

6. थ्रेटंड गर्भपात (Threatened Miscarriage)- इसमें गर्भपात से पहले खून निकलना, दर्द होना जैसे लक्षण अनुभव होते हैं जो आगे चल गर्भपात का रूप ले लेते हैं।

गर्भपात के लक्षण:

गर्भपात के लक्षण हर महिलाओं में अलग अलग हो सकते हैं और यह लक्षण गर्भावस्था के चरणों पर निर्भर करते हैं। कई मामलों में आपको गर्भपात के लक्षणों का पता भी नहीं चलता। नीचे कुछ गर्भपात के लक्षणों के बारे में पढ़ें।

* तेज कमर दर्द

* योनि से खून निकलना

* योनि से टिशु का निकलना

* तेज पेट दर्द

* मरोड़ उठना

अगर आपको इनमें से कुछ लक्षणों का अनुभव हो तो अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। ऐसा भी हो सकता है कि गर्भपात ना होने के बावजूद भी यह लक्षण दिखाई दें। आपके डॉक्टर ही जांच के बाद आपको सही जानकारी दे सकते हैं।

गर्भपात के कारण:

1. असामान्य गुणसूत्र (Abnormal Chromosomes)- गुणसूत्र (Chromosomes) में जीन्स (genes) होते हैं और यह जीन्स ही बच्चे के विकास को निर्धारित करते हैं। कुछ मामलों में असामान्य गुणसूत्र के कारण गर्भपात हो जाता है। यह गर्भपात मुख्यतः पहले 3 महीनों में ही होता है। प्राकृतिक उन भ्रूण को समाप्त कर देती हैं जो सही रूप से विकसित ना हो रहे हों।

2. थायराइड की समस्या- थायराइड की समस्या बांझपन और गर्भपात का मुख्य कारण है अगर किसी महिला को थायराइड की समस्या है तो उसके शरीर में हारमोंस असामान्य हो जाते हैं, जिसकी वजह से गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है।

3. मधुमेह- मधुमेह में भ्रूण का विकास सही ढंग से नहीं हो पाता और गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है। कई महिलाओं में मधुमेह गर्भावस्था के दौरान उत्पन्न हो जाता है जिससे भ्रूण को नुकसान हो आ सकता है, इसके लिए यह जरूरी है कि गर्भावस्था में इसका इलाज हो जाए। मधुमेह की वजह से होने वाले गर्भपात के लिए सबसे बेहतर है कि आप मधुमेह का सही इलाज करने के बाद ही गर्भधारण करें।

4. जीवन शैली- गर्भावस्था के दौरान स्मोकिंग, शराब का सेवन ब्रूम के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है और यह गर्भपात के खतरे को बढ़ाते हैं। कई अध्ययन यह भी दर्शाते हैं कि अधिक कैफीन (caffeine) लेना भी गर्भपात के खतरे को बढ़ाता है।

5. हॉर्मोन्स (Hormones) की समस्या- जब महिला का शरीर पर्याप्त मात्रा में प्रोजेस्‍टेरॉन हार्मोन (Progesterone Hormones) नहीं बना पाता तो भ्रूण का विकास रुक जाता है और गर्भपात हो जाता है।

6. मोटापा- मोटापा भी गर्भपात का एक कारण है वह महिलाएं जो मोटापे से ग्रस्त है उन्हें असामान्य हॉर्मोन्स की भी समस्या होती है जिससे गर्भपात का जोखिम बढ़ जाता है।

7. असामान्य गर्भाशय- गर्भाशय का असामान्य आकार भी भूर्ण को विकसित होने नहीं देता, जिस से गर्भपात हो जाता है। गर्भाशय की अन्य समस्याएं जैसे फाइब्रॉएड (Fibroids) और कमजोर गर्भाशय ग्रीवा (cervix) भी गर्भपात के कारण है और यह बांझपन के कारण भी है। कुछ दवाइयों और सर्जरी के माध्यम से इसे ठीक किया जा सकता है।

8. गर्भाशय के संक्रमण- संक्रमण जैसे माइकोप्लाज़्मा (Mycoplasma), रूबेला (Rubella), खसरा (Measles), लिस्टेरिया (Listeria), गलसुआ (Mumps), सूजाक (गोनोरिया, Gonorrhoea), पारवो-वाइरस (Parvovirus), क्लैमाइडिया (Chlamydia) आदि गर्भाशय की परत को प्रभावित करते हैं, जिससे गर्भपात का खतरा हो सकता है हालांकि यह दुर्लभ है और इसका इलाज संभव है।

9. रोग प्रतिरोधक क्षमता की समस्या- कुछ रोग प्रतिरोधक क्षमता की समस्या के कारण भी बार बार गर्भपात हो सकता है। महिलाएं जिन्हें स्वप्रतिरक्षित रोग (Autoimmune diseases) बीमारी की समस्या है उनके शरीर में कुछ ऐसे प्रतिपिंड (एंटीबॉडी) (anti-bodies) बनते हैं जो अपने ही शरीर के कोशिकाओं को प्रभावित करने लगते हैं और इन्हीं anti-bodies की वजह से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि आरंभिक समय में सही इलाज से गर्भावस्था के मौकों को बढ़ाया जा सकता है।

10. खून के थक्के बनने की समस्या- कुछ महिलाएं दुर्लभ जेनेटिक (Genetic) समस्या से ग्रस्त होती है, जिसमें शरीर में असामान्य खून के थक्के बनते हैं जिसे त्रोम्बॉफिलिया (Thrombophilia) कहते हैं और जिन महिलाओं में यह समस्या होती है, उनमें गर्भपात होने का खतरा ज्यादा होता है क्योंकि इसके कारण भूर्ण को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं पहुंच पाता, जिससे भ्रूण का विकास रुक जाता है।

11. दवाइयां- कुछ दवाइयां भी गर्भपात के खतरे को बढ़ाती है, इसीलिए यह जरूरी है कि आप अपने डॉक्टर से सलाह लें और पूछ कर ही कोई दवाई का सेवन करें।

गर्भपात से बचाव:

हालांकि गर्भपात से बचाव मुश्किल है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर आप गर्भपात को रोक सकते हैं।

1. गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच कराएं।

2. गर्भावस्था में धूम्रपान और शराब का सेवन ना करें।

3. रोजाना मल्टीविटामिन (Multivitamins) लें।

4. कम मात्रा में कॉफी ले क्योंकि अधिक कॉफी लेने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।

5. गर्भावस्था में हल्के काम करें और भारी वजन ना उठाएं।

6. आराम करें।

गर्भपात के लक्षणों कारणों और बचाव के लिए अपने डॉक्टर से अवश्य सलाह लें।

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