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डायबिटीज के बारे में जानें- Diabetes, Sugar, Madhumeh in Hindi

शुगर (डायबिटीज) आजकल लोगों में होने वाली आम और गंभीर बीमारी हो गयी है, जिससे कई प्रकार की अन्य स्वास्थ्य संबंधी बीमारियाँ उत्पन्न होने का ख़तरा बढ़ जाता है। डायबिटीज (शुगर) की बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति में इंसुलिन (Insulin) हॉर्मोन्स (Hormones) के सही ढंग से काम करने की क्षमता नही होती, जिस कारण इंसुलिन खून में मौजूद ग्लूकोस का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता। इन लोगों में इंसुलिन (Insulin) पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता और शरीर सही ढंग से इंसुलिन को इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिस कारण खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। इस लेख में जाने डायबिटीज, शुगर, मधुमेह के बारे में- Diabetes, Sugar, Madhumeh in Hindi.

जानें किन लोगों को डायबिटीज  होने का ख़तरा ज़्यादा होता है जो कि नीचे बताए गए हैं-

Type 1 डायबिटीज (शुगर) होने के खतरे

हालांकि Type 1 डायबिटीज के सही कारण अभी अज्ञात हैं, लेकिन नीचे कुछ कारण दिए गए हैं जो डायबिटीज के खतरे को बढ़ाते हैं-

* परिवार की हिस्ट्री- आपको Type 1 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है, अगर आपके परिवार या खानदान में किसी को डायबिटीज हो।

* पर्यावरण कारक- कुछ पर्यावरण कारक हैं, जैसे कि वायरल बीमारी, जो Type 1 डायबिटीज को जन्म देते हैं।

* Auto-antibodies- अगर आपके शरीर में Auto-antibodies मौजूद हो तो यह आपके शरीर के रोग प्रतिरोधक प्रणाली को नष्ट करने लगते हैं, जिससे डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।

Type 2 डायबिटीज होने के खतरे

कुछ कारक नीचे दिए गए हैं जो Type 2 डायबिटीज के खतरे को उत्पन्न करते हैं-

1. मोटापा- अत्यधिक वजन के कारण आपके शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन प्रतिरोधक हो जाती हैं, जिससे Type 2 डायबिटीज होने का खतरा होता है।

2. पारिवारिक इतिहास- अगर आपके परिवार के कोई भी सदस्य डायबिटीज से ग्रस्त हो तो आपको भी डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।

3. निष्क्रियता- अगर आप कम सक्रिय हैं, तो भी आपको Type 2 डायबिटीज होने का खतरा बना रहता है क्योंकि इससे आपके शरीर की कोशिकाएं भी निष्क्रिय हो जाती हैं और अगर आप सक्रिय जीवन जीते हैं और नियमित व्यायाम करते हैं तो आप की शरीर की कोशिकाएं भी इंसुलिन के प्रति सक्रिय रहती है और डायबिटीज को सही ढंग से नियंत्रित करती है।

4. उम्र- जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे Type 2 डायबिटीज का खतरा भी बढ़ता है क्योंकि उम्र बढ़ने से निष्क्रियता बढ़ती जाती है।

5. गर्भावस्था में मधुमेह- कई महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान भी Type 2 डायबिटीज होने का खतरा रहता है।

6. Polycystic Ovary Syndrome (Pcos)- जिन महिलाओं को Pcos की बीमारी होती है उन्हें भी Type 2 डायबिटीज होने के ख़तरा अधिक होता है।

7. उच्च रक्तचाप- उच्च रक्तचाप भी Type 2 डायबिटीज होने के खतरे को बढ़ाता है।

8. अनियमित कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol)- शरीर में अनियमित कोलेस्ट्रॉल के स्तर Type 2 डायबिटीज के खतरे को जन्म देते हैं।

डायबिटीज के कारण होने वाली बीमारियां-

लंबे समय से डायबिटीज से ग्रस्त होने के कारण कई बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं। अगर आप अपने डायबिटीज को सही ढंग से नियंत्रित ना करें तो यह कई बीमारियों का कारण बन सकती है। नीचे कुछ डायबिटीज की वजह से होने वाली बीमारियों के बारे में जानें-

1. हृदय संबंधी बीमारी- Heart Attack या Heart Stroke

2. नसों से संबंधित बीमारियां- खून में अत्यधिक शुगर की वजह से नसों को नुकसान होने का खतरा रहता है, जिससे नसों में दर्द, सुन और झनझनाहट होती है। इससे पाचन संबंधी बीमारियां भी होती है। और यह पुरुषों में Erectile Dyfunction का कारण भी है।

3. किडनी की बीमारी- डायबिटीज की वजह से किडनी में मौजूद सुक्ष्म ब्लड Vessels को नुकसान होने लगता है जिस कारण किडनी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।

4. आंख संबंधी बीमारियां- डायबिटीज से आंखों को भी नुकसान पहुंचता है जिससे आंखों की दृष्टि कम होने लगती है।

5. इंफेक्शन- डायबिटीज में चोट, घाव या कट को ठीक होने में काफी समय लगता है जिससे इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है।

6. त्वचा के रोग- डायबिटीज कई प्रकार के त्वचा संबंधी रोगों के खतरे को बढ़ा देता है।

7. सुनने की शक्ति- डायबिटीज से कई लोगों में सुनने की शक्ति भी कम हो जाती है।

8. Alzheimer’s रोग- Type 2 डायबिटीज Alzheimer के रोग के खतरे को बढ़ा देता है।

डायबिटीज के रोकथाम

डायबिटीज के कोई रोकथाम नहीं है हालांकि जीवन शैली में कुछ बदलाव करके इसे नियंत्रित या कम किया जा सकता है।

1. अच्छा स्वास्थ्य भोजन खाएं- कम वसा और कैलरी युक्त भोजन खाएं, ज्यादातर फल और ताजी सब्जियां खाएं।

2. व्यायाम करें- रोजाना नियमित रूप से व्यायाम या योग करें रोजाना चले।

3. वजन कम करें- अगर आप का वजन ज्यादा है तो उसे कम करें। वजन थोड़ा कम करने से डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है।

डायबिटीज के लिए जांच-

डायबिटीज के लिए कई प्रकार की जांच हैं जो नीचे दिए गए हैं-

1. Glycated Hemoglobin A1C Test- इस जांच में फास्टिंग की जरूरत नहीं होती है। यह जांच आपके खून में ब्लड शुगर को दो से तिन महीने के औसत स्तर को दर्शाता है। A1C के 5. 7 प्रतिशत से 6.4 प्रतिशत होने का मतलब आपको डायबिटीज होने का खतरा है।

2. Fasting Blood Sugar Test- इस जांच में आपको उपवास रखने की जरूरत होती है, इसमें जांच से 8 घंटे पहले तक सिर्फ पानी के कुछ नहीं खा सकते हैं। इसमें खून में मौजूद ग्लूकोज की मात्रा को मापा जाता है।

3. Oral Glucose Tolerance Test- इस जांच में यह जाना जाता है कि आपका शरीर ग्लूकोस को किस तरह नियंत्रित रखता है। इस जांच में आपको उपवास रखना पड़ता है और आपके खून में शुगर की मात्रा को मापा जाता है। उसके बाद आपको मीठा जूस या अन्य पेय-पदार्थ पीने के 2 घंटे बाद फिर से जांच करानी पड़ती है, इसमें आपके खून में बढ़े हुए शुगर की मात्रा को मापा जाता है। आपके डॉक्टर दोनों जाचों की तुलना करके यह पता लगाते हैं कि आपका शरीर इस शुगर ग्लूकोस को किस तरह नियंत्रित कर रहा है।

4. Random Blood Sugar Test- इस जांच को किसी भी समय किया जा सकता है, चाहे आपने कभी भी खाना खाया हो।

5. Home Blood Glucose Strips Device- इस उपकरण की मदद से आप घर पर भी अपने ब्लड शुगर के स्तर की जांच कर सकते हैं।

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